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हिंदी किताब कैसे प्रकाशित करें: सही क्रम में सभी चरण
पहली बार लिखने वाले ज़्यादातर हिंदी लेखकों को बताया जाता है कि किताब छपवाना बहुत उलझा हुआ काम है। ऐसा नहीं है, लेकिन यह काम एक तय क्रम में होता है। किसी चरण को आगे-पीछे करने पर ही समय और पैसा बर्बाद होता है। यह रहा सही क्रम।
1. पांडुलिपि पूरी करें, फिर बार-बार बदलना बंद करें
प्रकाशक उसी किताब का कोटेशन और समय-सीमा दे सकता है जो पूरी हो चुकी हो। अगर आप अब भी अध्याय जोड़ रहे हैं, तो आगे का हर काम, संपादन से लेकर पृष्ठ संख्या और कवर की रीढ़ (स्पाइन) की चौड़ाई तक, दोबारा करना पड़ेगा।
2. संपादन करवाएँ
संपादन तीन स्तर का होता है: प्रूफ़रीडिंग (वर्तनी, मात्राएँ, विराम चिह्न), कॉपी-एडिटिंग (एकरूपता, व्याकरण, वाक्यों का प्रवाह) और गहन संपादन (ढाँचा, गति, तर्क)। हिंदी पांडुलिपियों में सावधान प्रूफ़रीडिंग खास तौर पर ज़रूरी है, क्योंकि मात्रा, नुक़्ता और संयुक्ताक्षर की गलतियाँ स्क्रीन पर आसानी से छूट जाती हैं और छपने के बाद ठीक नहीं हो सकतीं। उतना ही संपादन करवाएँ जितनी आपकी पांडुलिपि को ज़रूरत है, उससे ज़्यादा नहीं।
3. टाइपसेटिंग
टाइपसेटिंग आपकी फ़ाइल को किताब के पन्नों में बदलती है: सही देवनागरी फ़ॉन्ट, हाशिये, पंक्तियों के बीच की जगह, अध्यायों की शुरुआत और पृष्ठ संख्या। जैसी है वैसी छापी गई Word फ़ाइल, Word फ़ाइल जैसी ही दिखती है। अच्छी टाइपसेटिंग वह फ़र्क है जिसे पाठक महसूस करता है, भले उसका नाम न ले पाए।
4. कवर
पूरा कवर टाइपसेटिंग के बाद तय होता है, क्योंकि स्पाइन की चौड़ाई अंतिम पृष्ठ संख्या और कागज़ पर निर्भर करती है। सामने का कवर फ़ोन की स्क्रीन पर छोटे से थंबनेल में किताब बेचता है, इसलिए शीर्षक उस आकार में भी साफ़ पढ़ा जाना चाहिए।
5. ISBN
दुकानों के ज़रिए बिकने वाली हर छपी किताब को ISBN चाहिए। भारत में ISBN राष्ट्रीय ISBN एजेंसी निःशुल्क देती है, प्रकाशकों को भी और स्वयं प्रकाशन करने वाले लेखकों को भी। ISBN से जुड़ा नाम किताब का आधिकारिक प्रकाशक (publisher of record) होता है, जो ज़्यादातर लेखकों की सोच से कहीं ज़्यादा मायने रखता है। पढ़ें हमारी गाइड: ISBN क्या है, और उस पर किसका नाम है यह क्यों मायने रखता है।
6. छपाई और वितरण
आजकल ज़्यादातर नई किताबें प्रिंट-ऑन-डिमांड से छपती हैं: कोई ऑर्डर करता है तभी एक प्रति छपती है, इसलिए पहले से स्टॉक खरीदने की ज़रूरत नहीं होती। प्रिंट-ऑन-डिमांड सेवाएँ किताब का विवरण Amazon और Flipkart जैसे ऑनलाइन स्टोर तक भी पहुँचाती हैं। किताब लाइव होने से पहले उसकी छपी हुई प्रूफ़ प्रति ज़रूर जाँचें।
7. स्टोर पर दिखने में धैर्य रखें
वितरण शुरू होने के बाद ऑनलाइन स्टोर नई किताब को अपने समय पर दिखाते हैं, अक्सर कुछ हफ़्तों में। यह सामान्य है और किसी भी प्रकाशक के हाथ में नहीं। शुरुआती दिनों में अपनी किताब को शीर्षक से नहीं, ISBN से खोजें।