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ISBN क्या है, और उस पर किसका नाम है यह क्यों मायने रखता है

ISBN (इंटरनेशनल स्टैंडर्ड बुक नंबर) 13 अंकों की एक संख्या है जो किसी एक किताब के एक खास संस्करण की पहचान करती है। किताबों की दुकानें, पुस्तकालय और ऑनलाइन स्टोर इसी से आपकी किताब ढूँढते, मँगाते और बेचते हैं।

एक किताब, कई ISBN

हर रूप (फ़ॉर्मेट) का अपना ISBN होता है। एक ही किताब का पेपरबैक, हार्डकवर और ई-बुक तीन अलग उत्पाद हैं, इसलिए उन पर आम तौर पर तीन अलग संख्याएँ होती हैं। बड़े बदलावों वाले संशोधित संस्करण को भी नया ISBN मिलता है।

भारत में ISBN कैसे मिलता है

भारत में ISBN राष्ट्रीय ISBN एजेंसी निःशुल्क देती है। प्रकाशक एजेंसी में पंजीकरण कराते हैं और अपनी किताबों के लिए संख्याएँ पाते हैं। लेखक व्यक्तिगत रूप से भी स्वयं-प्रकाशक के तौर पर आवेदन कर सकते हैं।

आधिकारिक प्रकाशक (Publisher of Record)

हर ISBN किसी प्रकाशक के नाम पर दर्ज होता है। जिसके नाम पर यह दर्ज है, वही किताब का आधिकारिक प्रकाशक है, और स्टोरों व कैटलॉग में किताब के विवरण में यही नाम दिखता है। कुछ सेल्फ़-पब्लिशिंग प्लेटफ़ॉर्म ISBN अपने नाम पर जारी करते हैं, जिससे आपकी किताब उनके कैटलॉग में उनकी किताब के रूप में दर्ज होती है। यह ज़रूरी नहीं कि गलत हो, लेकिन अनुबंध पर हस्ताक्षर से पहले आपको यह पता होना चाहिए।

आगे चलकर यह क्यों मायने रखता है

एक बार किताब किसी ISBN के साथ वितरण में आ जाए, तो वह संख्या आम तौर पर किसी दूसरे प्रकाशक को हस्तांतरित नहीं हो सकती। अगर आप बाद में किताब कहीं और ले जाना चाहें, तो अक्सर नया ISBN और नई लिस्टिंग चाहिए होती है, यानी समीक्षाएँ और सर्च में पहचान फिर से शून्य से शुरू।

हम इसे कैसे संभालते हैं

हमारे Imprint, Edition और Select पैकेज से प्रकाशित हर किताब पर Ashvattha Press का ISBN होता है, और आधिकारिक प्रकाशक हम ही रहते हैं। हम आपकी किताब किसी और के पंजीकरण पर जारी नहीं करते।

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