Guides · लेखकों के लिए · Read in English
सेल्फ़-पब्लिशिंग में रॉयल्टी कैसे बनती है (और पृष्ठ संख्या क्यों मायने रखती है)
छपी किताब पर रॉयल्टी कितनी कम होती है, यह देखकर लेखक अक्सर हैरान होते हैं। इसका कारण सीधा हिसाब है, और इसे समझ लेने पर आप किताब छपने से पहले बेहतर फ़ैसले ले सकते हैं।
मूल सूत्र
प्रिंट-ऑन-डिमांड किताब पर प्रति प्रति आपकी रॉयल्टी मोटे तौर पर वह राशि है जो पाठक द्वारा चुकाई गई कीमत (MRP) में से तीन कटौतियों के बाद बचती है:
- स्टोर का हिस्सा। ऑनलाइन स्टोर MRP का अच्छा-ख़ासा हिस्सा रखते हैं।
- छपाई की लागत। हर प्रति अलग से छपती है, और हर पन्ने के साथ लागत बढ़ती है।
- वितरण प्लेटफ़ॉर्म का हिस्सा। यह इस पर निर्भर करता है कि किताब किस प्लान के तहत वितरित हो रही है।
पृष्ठ संख्या क्यों मायने रखती है
छपाई की लागत पन्नों की संख्या के साथ बढ़ती है, लेकिन MRP आम तौर पर उसी अनुपात में नहीं बढ़ता। कम कीमत वाली लंबी किताब पर प्रति प्रति बहुत कम रॉयल्टी बचती है। सही आकार, फ़ॉन्ट साइज़ और स्पेसिंग के साथ सावधान टाइपसेटिंग, किताब को पढ़ने में कठिन बनाए बिना पृष्ठ संख्या घटा सकती है।
कीमत क्यों मायने रखती है
MRP में थोड़ी सी बढ़ोतरी लगभग पूरी की पूरी रॉयल्टी में जुड़ती है, क्योंकि छपाई की लागत वही रहती है। अपनी किताब की कीमत अपनी विधा की मिलती-जुलती किताबों को देखकर तय करें, सबसे कम संभव संख्या पर नहीं।
पैसा कब आता है
ऑनलाइन स्टोर बिक्री के कुछ हफ़्तों बाद वितरण प्लेटफ़ॉर्म को भुगतान करते हैं, इसलिए रॉयल्टी हमेशा प्रति बिकने के कुछ हफ़्ते बाद आती है। एक निष्पक्ष अनुबंध में रॉयल्टी वास्तव में प्राप्त राशि पर दी जाती है, और विवरण (स्टेटमेंट) तय समय पर मिलते हैं।
हमारे साथ यह कैसे काम करता है
हमारे Imprint और Edition पैकेज में पूरी रॉयल्टी आपकी रहती है। Select में किताब हमारे पास रहती है, हम तिमाही विवरण के साथ आपका रॉयल्टी हिस्सा देते हैं, और आप कभी भी बिक्री का मूल डेटा माँग सकते हैं।